Funny Story in Hindi with Moral | बीरबल का न्याय | मजाकिया कहानी

Funny Story in Hindi with Moral | बीरबल की चतुराई |Very Short Funny Story in Hindi | मजाकिया कहानी हिंदी मेंबीरबल का न्याय

एक बार एक किसान और उसका पड़ोसी अकबर (Akbar) के दरबार में अपनी शिकायत लेकर पहुँचे।

किसान ने अपने पड़ोसी की तरफ इशारा करते हुए अकबर (Akbar) से कहा – “महाराज, मैंने इससे एक कुआँ खरीदा था, लेकिन अब यह चाहता है कि मैं इसे उस कुएँ के पानी का भी पैसा दूँ। 😟

इस पर पड़ोसी किसान ने कहा – “जी महाराज! क्योंकि मैंने इसे कुआँ बेचा था, पानी नहीं।”

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दोनों की बात सुनने के बाद अकबर ने बीरबल (Birbal) से मामले को रफ-दफा करने (निपटाने) को कहा।

तब बीरबल (Birbal) ने उस पड़ोसी से कहा कि तुमने अभी कहा कि, “मैंने यह कुआँ इस किसान को बेच दिया था।” इसका मतलब कि यह कुआँ इस किसान का हुआ, फिर भी तुम अपना पानी इसके कुएं में क्यों रख रहे थे। क्या यह सही है?

इस case में तुमको या तो कुएं में पानी रखने का किराया देना पड़ेगा या अपना सारा पानी बाहर निकालना पड़ेगा। 😂

इतना सुनते ही पड़ोसी ने अपनी गलती मानी और उसने इस case को वही रफ-दफा करने की गुजारिश की। 🚶

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गधे से मनुष्य बनाना । वैद्य और गधेवाला शिक्षाप्रद संक्षिप्त हिंदी कहानी । Make Man from Ass Best Hindi Funny Moral Story

एक वैद्य (Doctor) था। वह अपने साथ एक आदमी को रखता था। एक दिन वे एक गाँव से रवाना (Depart) हुए तो किसी बात को लेकर वैद्य ने उस आदमी की ताड़ना (Thrashing) की – ‘अरे, तू जानता नहीं, पहले तू कैसा था? तू तो गधा था। मैंने तेरे को गधे से मनुष्य बनाया! मैंने तेरा इतना उपकार किया, फिर भी तू मेरी बात मानता नहीं!’ पास में ही एक गधेवाला जा रहा था। उसने वैद्य की बात सुन ली कि यह गधे से मनुष्यबनाता है।

वह वैद्य के पास आया और बोला कि ‘महाराज! यों तो मेरे पास कई गधे (asses) हैं, पर आपको दो गधे (asses) देता हूँ, मेहरबानीकरके इनको आप मनुष्य बना दो।’ वैद्य बोला – ‘हाँ, बना देंगे, पर इसका रुपया लगेगा भाई! एक गधे का सौ रुपया लगेगा।’ गधे वाले ने कहा – ‘ठीक है, मैं आपको अभी पूरा रुपया दे देता हूँ, आप इनको मनुष्य बना दो।’ उसने वैद्य को दो सौ रुपये दे दिये और अपने दो गधे (asses) देकर चला गया।

वैद्य ने दोनों गधों को बाजार में जाकर बेच दिया। अब वह गधे वाला जब आकर पूछा तो वैद्य बोले कि ‘अभी तुम्हारे गधे मनुष्य बन रहे हैं। उन पर मसाला चढ़ा दिया है।’ ऐसा करते तीन-चार महीने बीत गये। अब वह गधे वाला आया तो वैद्य बोला कि ‘अरे यार! तू आया नहीं! तेरे गधे तो कब से मनुष्य बन गये और उनकी नौकरी भी लग गयी! जिस गधे के ज्यादा बाल थे, वह तो मौलवी (Cleric) बन गया और स्कूल में बच्चों को पढ़ाता है, और दूसरा गधा स्टेशन मास्टर बन गया। मैंने दोनों को ठीक तरह से मनुष्य बना दिया। परन्तु तू देरी से आया, इसलिये मसाला ज्यादा चढ़ गया और वे नौकरी में लग गये। अब तू जाने भाई!’

गधे वाला घास लेकर स्कूल गया। वैद्य ने जिसका नाम बताया था, उस दाढ़ी वाले मौलवी के सामने जाकर वह खड़ा हो गया और घास दिखाते हुए कहने लगा – ‘आ जा, आ जा! घास ले ले, ले ले!’ वह मौलवी चिल्लाया – ‘अरे! यह कौन है? क्या करता है? पागल हो गया है क्या?’ गधे वाला बोला – ‘मैंने सौ रूपये खर्च करके तेरे को गधे से मनुष्य बनाया (Make Man from Ass) है! मैं पागल कैसे हो गया?’ मौलवी ने उसको पागल कहते हए बाहर निकाल दिया। अब वह स्टेशन मास्टर के पास पहुँचा और उसको भी घास दिखाकर कहने लगा – ‘आ जा, आ जा! ले ले, ले ले!’ स्टेशन मास्टर बोला – ‘अरे, यह क्या करता है!’ लोगों ने बताया कि यह पाठशाला (School) में भी गया था और मौलवी को भी ऐसा ही कह रहा था! स्टेशन मास्टर ने भी उसको पागल समझकर बाहर निकाल दिया।

अब गधे वाला वापस वैद्य के पास आया और बोला कि वे दोनों तो मेरे को पागल कहते हैं! वैद्य बोला – ‘अरे भाई! मैंने पहले ही कहा था कि तू देरी से आया, इसलिये उन पर ज्यादा मसाला चढ़ गया! अधिक मसाला चढ़ने से अब वे कब्जे में नहीं रहे! अब मैं क्या करूँ!’

इसी तरह मनुष्य अभिमान कर लेता है कि मैं बड़ा समझदार हूँ, बड़ा जानकार हूँ, तुम्हारे को वर्षों तक पढ़ा सकता हूँ तो यह उस पर मसाला ज्यादा चढ़ गया। यह पता नहीं कि पहले जन्म में क्या थे, पर अब मनुष्य बन गये तो मसाला अधिक चढ़ गया कि मैं ऐसा हूँ, तुम समझते नहीं! इस तरह जब मसाला अधिक चढ़ जाता है, तब अभिमान हो जाता है। फिर मनुष्य किसी की बात नहीं मानता!

शिक्षा | Moral

हमें आँख बंद करके किसी की भी बात पर विश्वास नही करना चाहिए। ऐसा करने से हमें समय और धन दोनों का नुकसान सहना पड़ता है।